रेमॉन मैगसेसे के मंच से स्पीच देने के बाद रवीश कुमार ने मौजूदा पत्रकारिता के स्वरूप पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि आज न्यूज चैनलों से रिपोर्टर खत्म किए गए जा चुके हैं और अब कोई भी इन्वेस्टिगेट करके खबर निकालने वाला नहीं है. रवीश कुमार ने कहा कि अब न्यूज चैनलों के पास जिम जाने वाले और चॉकलेटी चेहरे वाले एंकर बचे हैं जो कार्यक्रम के दौरान अपनी 'मसल पावर' दिखाते हैं. बता दें कि अमूमन सामाजिक कार्यों के लिए दिए जाने वाला रैमॉन मैगसेसे पुरस्कार रवीश की सामाजिक पत्रकारिता को रेखांकित करता है. इस पुरस्कार से नवाज़े जाने वाले रवीश पहले हिंदी पत्रकार हैं. बहुत नीचे से उन्होंने अपने सफ़र की शुरुआत की और यहां तक पहुंचे हैं. 1996 से रवीश कुमार NDTV से जुड़े रहे हैं. शुरुआती दिनों में वह NDTV में आई चिट्ठियां छांटने का काम करते थे.
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