जिला मुख्यालय से 125 किलोमीटर दूर मेलघाट के नंदूरी गांव में कुपोषण की समस्या सालों से हर घर में पांव पसारे हुए है. लेकिन अब इस स्थिति में बदलाव हो रहा है. स्वस्थ भारत के लिए काम करने वाले लोगों की वजह से ये संभव हुआ है. इन्हें सामुदायिक पोषण कार्यकर्ताओं के नाम से जाना जाता है. ये लोग नदी-नालों, पहाड़-जंगलों को पार करते हुए सुदूर गांव में जाते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि किसी बच्चे को कुपोषण का सामना ना करना पड़े. इनका लक्ष्य जीरो कैजुअल्टी का है.
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